सन 2011 में एक फ़िल्म आई थी ‘बॉडीगार्ड'..अरे वही अपने ‘सलमान भाई’ वाली और जिसमें तैमूर की अम्मी ‘करीना’ भी थी...वो फ़िल्म तो लगभग सभी ने देखी होगी...
फ़िल्म का वो सीन तो आपको याद ही होगा जहाँ अपने सलमान भाई करीना की सिक्युरिटी के लिए उसके क्लासरूम में भी चले जाते हैं...और बाद में प्रोफेसर से बद्दतमीजी कर बैठते हैं जिसकी वजह से प्रोफेसर सल्लू भाई को क्लास से बाहर भगा देता है...
आप सोचेंगे इसमें कौन सी खास बात है...खास बात ये है कि ये फ़िल्म एक ‘मलयालम' फ़िल्म की रीमेक थी जिसमें इस सेम सीन को थोड़ा अलग तरीके से दिखाया गया है...
ओरिजनल मलयालम फ़िल्म में प्रोफेसर हीरो से पूछता है कि--गुरुत्वाकर्षण की खोज किसने की.?
हीरो कहता है--‘वैसे तो गुरुत्वाकर्षण की खोज,
सबसे पहले भारत के भाष्कराचार्य ने की थी,लेकिन लोग न्यूटन की लाल करते हैं' - हीरो का ये जवाब सुनकर प्रोफेसर चिढ़ जाता है और उसे क्लास से बाहर निकाल देता है...
अब सवाल ये है ऐसी कौन सी मजबूरी आ गई थी कि,
बॉलीवुड वालों को,जो फ़िल्म के हिंदी रीमेक में ये सीन गायब ही करना पड़ गया..
जबकि दोनों फ़िल्म का डायरेक्टर/राइटर एक ही शख्स था...वैसे तो उसने अपनी पूरी फिल्म फ्रेम बाय फ्रेम छाप दी थी बस इस एक डायलॉग से क्या फर्क पड़ जाता..
ऐसा कोई भी मोमेंट जहाँ इंडियन ऑडियंस,अपने इतिहास या महापुरुषों पर गर्व करे,आखिर ये सब बॉलीवुड फिल्मों से गायब क्यों रहती हैं...
चलो ये तो 9 साल पहले की बात है,आपको एक ताजा ताजा उदाहरण देती हूँ...
‘अक्षय कुमार' की एक फ़िल्म आनेवाली है,
जिसका नाम है ‘लक्ष्मीबॉम्ब'...आप सबने शायद तमिल हॉरर फिल्म ‘कंचना' देखी हो,बस ये उसी का रीमेक है...
लेकिन यहाँ एक बात बदल दी गई है...जहाँ ओरिजिनल फ़िल्म में हीरो नाम का ‘राघव' है,वहीं इस हिंदी रीमेके में हीरो का नाम ‘आसिफ़' कर दिया गया है...
आखिर ऐसी कौन सी क्रिएटिविटी बीच में आ गई थी,जो लीड किरदार का धर्म ही बदलना पड़ गया...जबकि हिरोइन और उसकी फैमली को हिन्दू ही दिखाया जा रहा है...अब इसे कोई लव जिहाद का प्रोपोगेंडा न कहे तो और क्या कहे...
गौर करनेवाली बात ये भी है कि,यहाँ भी दोनों ही फिल्मों के डायरेक्टर एक ही हैं...होता ये है कि बॉलीवुड के प्रोड्यूसर्स एकबार ओरिजनल फ़िल्म के राइट्स खरीद लेने के बाद उसे अपनी तरह से मनमाने ढंग से बनाते हैं...
शायद इन्हीं मनमानियों के चलते डायरेक्टर ‘राघवा लॉरेन्स' ने फ़िल्म को बीच में ही छोड़ दिया था.(बाद में अक्षय ने उन्हें मनाकर फिर से काम करने को राजी किया)
ऐसे कई सारे उदाहरण हैं जहाँ बॉलीवुड फ़िल्ममेकर्स द्वारा ऐसे बदलाव कर दिए जाते हैं..
कहने को तो ये छोटी-छोटी बातें हैं,इनसे कोई फर्क नहीं पड़ता लेकिन अगर ये वाकई छोटी-छोटी बातें हैं और इनसे कोई फर्क नहीं पड़ता तो बॉलीवुड में इन्हें बदलने की नौबत क्यों आ जाती है..


एक अच्छा लेख समाज के ओछी , नीच हरक्क्त पर एक थप्पड़ तो बनता ही है।
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