गौरवपूर्ण थाती : धारा चिकित्सा
चरक संहिता में एक मिरेकल चिकित्सा का विस्तार से वर्णन है जिसे धारा चिकित्सा का नाम दिया गया है।
धारा चिकित्सा में, पहले तीन या चार दिनों तक शरीर के एफक्टेड अंगों को विभिन्न जड़ी बूटियों एवम अग्नि के द्वारा चिकित्सा के लिए तैयार किया जाता है। सभी रंध्रों को खोला जाता है ।
जब अंग धारा चिकित्सा के लिए तैयार हो जाते है तो शुरू होता है धारा ट्रीटमेंट।
इसमें पांच छह लीटर गर्म तेल में विभिन्न जड़ी बूटियों को मिलाया जाता है। इस प्रकार स्नेह धारा तैयार किया जाता है। अगर तेल के स्थान पर दूध का प्रयोग किया जाए तो इसे क्षीर धारा और अगर छाछ का प्रयोग किया जाए तो तक्र धारा की संज्ञा दी गई है।
अब इस जड़ी बूटी मिले गुनगुने गाढ़े तेल, दूध या छाछ को धारा के रूप में एफक्टेड अंग पर एक निश्चित उचाई से लगातार छोड़ा जाता है। धारा शरीर पर गिरती हुई पुनः एक बर्तन में इकट्टी कर ली जाती है और पुनः एक निश्चित ताप पर गर्म की जाती है और दोबारा शरीर पर अभिषेक की भांति अर्पित की जाती है। इस प्रकार तीन सौ से चार सौ लीटर धारा से शरीर का अभिषेक किया जाता है।
त्वचा के पहले से ही खुले हुए रंध्रों पर जब गाढ़ी गर्म धारा पड़ती है तो तेजी से रिवर्स ओसमोसिस की प्रकिर्या शुरू हो जाती है। इसके साथ शरीर मे इकट्ठे हो चुके टॉक्सिन्स तेजी से शरीर से बाहर की तरफ भागते है और गर्म तेल में मिल कर बह जाते है।
धारा के गर्म होने के कारण तेजी से पसीना आता है जो detoxification की प्रकिर्या को तेज करता है।
इसी दौरान अत्यधिक रिवर्स ओसमोसिस होने के कारण cells में और उसके चारों और एक भयानक वैक्यूम क्रिएट हो जाता है। इस वैक्यूम को भरने के लिए शरीर की कोशिकाएं सक्शन पंप की तरह कार्य करने लगती है। पहले से ही गर्म धारा में मिलाया गया लेमन आयल जैसा कॉम्पोनेन्ट carrier का कार्य करता है और इस प्रकार गर्म धारा में मिली हुई विभिन्न जड़ी बूटियों की तेजी से शरीर के बीमार अंग में लोकल डिलीवरी हो जाती है।
दकियानूसी सा लगने वाला, पिछड़ा से दिखने वाला, भारत में ही उपेक्षित सा, भुला दिया गया यह विधान कितना वैज्ञानिक है, इसका अंदाज़ा आप ऊपर की लाइनों से लगा सकते है।
Methods of drug delivery को आधुनिक विज्ञान खोज खोज कर पागल हुआ जा रहा है और ड्रग डिलीवरी का जो प्राचीनतम विधान हमारी किताबो हजारों साल पहले से लिखा हुआ है, उसको हमने उपेक्षित कर रखा है।
भगवान की मूर्तियों पर किये जाने वाला दुग्ध अभिषेक, शनि महाराज पर किया जाने वाला तेल अभिषेक, हनी अभिषेक इत्यादि और कुछ नही, होली धारा चिकित्सा का सिंबॉलिक रूप ही है जिसको धार्मिक भावनाओ के साथ जोड़ कर प्रस्तुत किया गया होगा ताकि मनुष्य इस पावरफुल विधान को भूल ना जाये।
इस पूरी पोस्ट को पढ़ने के बाद, एक काम तो आप कर ही सकते है, कि तुरंत स्नानघर से फव्वारा हटवा कर लोटा बाल्टी रख दिया जाए, ताकि रोज आप जल से शिरोधारा का लाभ प्राप्त कर सकें।
श्रेय :- डॉ सुनील वर्मा
दिनांक :- १२.०१.२०२१
---#राज_सिंह---
vedic Science के फेसबुक पेज से साभार उद्धृत




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